
Q1. उत्तराखण्ड राज्य के किस स्थान पर कुली बेगार न देने की ऐतिहासिक शपथ ली गई थी? (Uttarakhand GK)
A) सोमेश्वर
B) श्रीनगर
C) बागेश्वर
D) चमोली
बागेश्वर उत्तराखण्ड के स्वतंत्रता आंदोलन का एक प्रमुख केंद्र रहा है। वर्ष 1921 में सरयू नदी के तट पर आयोजित विशाल जनसभा में लोगों ने अंग्रेजी शासन की अमानवीय कुली बेगार प्रथा को न मानने की शपथ ली। इस आंदोलन ने पहाड़ी जनता में राजनीतिक चेतना जागृत की और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संगठित प्रतिरोध को मजबूती प्रदान की।
Q2. उत्तराखण्ड राज्य का राजकीय पुष्प कौन-सा है?
A) कमल
B) ब्रह्मा कमल
C) गुलाब
D) बुरांश
ब्रह्मा कमल उत्तराखण्ड का राजकीय पुष्प है, जो उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है। यह पुष्प धार्मिक, सांस्कृतिक और औषधीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। बद्रीनाथ, केदारनाथ जैसे तीर्थ क्षेत्रों में इसकी विशेष मान्यता है। इसकी दुर्लभता और पवित्रता के कारण इसे राज्य पुष्प घोषित किया गया।
Q3. देहरादून में प्रजा मण्डल की स्थापना किस उद्देश्य से की गई थी?
A) ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता पाना
B) जनता को समाज सुधार हेतु संगठित करना
C) गोरखा शासन से मुक्ति पाना
D) टिहरी राज्य के कुशासन से जनता को मुक्त कराना
देहरादून में प्रजा मण्डल की स्थापना टिहरी रियासत में व्याप्त अत्याचार, कर शोषण और निरंकुश शासन के विरोध में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य जनता को संगठित कर उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करना था। प्रजा मण्डल आंदोलन ने टिहरी राज्य में लोकतांत्रिक चेतना को बढ़ावा दिया और जन आंदोलन को नई दिशा दी।
Q4. रुद्रप्रयाग, चम्पावत एवं बागेश्वर जिलों का सृजन किस वर्ष किया गया था?
A) 1995
B) 1998
C) 1997
D) 1996
उत्तराखण्ड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) में प्रशासनिक सुविधा और बेहतर शासन व्यवस्था के लिए वर्ष 1997 में रुद्रप्रयाग, चम्पावत और बागेश्वर जिलों का गठन किया गया। इन नए जिलों के सृजन से दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में प्रशासन की पहुँच आसान हुई तथा विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता मिली।
Q5. निम्न में से डोलापालकी आन्दोलन के प्रवर्तक कौन थे?
A) हरि प्रसाद टम्टा
B) बलदेव सिंह आर्य
C) खुशीराम
D) जयानन्द भारती
डोलापालकी आंदोलन उत्तराखण्ड में सामाजिक कुरीतियों और शोषण के विरुद्ध चलाया गया एक महत्वपूर्ण जन आंदोलन था। इसके प्रवर्तक जयानन्द भारती थे, जिन्होंने समाज में समानता और मानव गरिमा की स्थापना के लिए संघर्ष किया। यह आंदोलन विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में जनजागरण और सामाजिक सुधार का माध्यम बना।
Q6. राज्य लोक सेवा आयोग अपनी वार्षिक रिपोर्ट किसे सौंपता है?
A) राज्य के मुख्यमंत्री को
B) राज्य के राज्यपाल को
C) राज्य के मुख्य न्यायाधीश को
D) राज्य के गृहमंत्री को
राज्य लोक सेवा आयोग संवैधानिक संस्था है, जो राज्य में नियुक्तियों से संबंधित कार्य करती है। आयोग अपनी वार्षिक रिपोर्ट राज्यपाल को प्रस्तुत करता है। राज्यपाल इस रिपोर्ट को राज्य विधानमंडल के समक्ष रखवाते हैं, जिससे आयोग के कार्यों पर लोकतांत्रिक निगरानी बनी रहती है।
Q7. कार्तिकेयपुर शासकों के समय उत्तराखण्ड में किस महान संत का आगमन हुआ था?
A) रामानुजाचार्य
B) बल्लभाचार्य
C) शंकराचार्य
D) रामानन्दाचार्य
कार्तिकेयपुर शासकों के काल में आदि शंकराचार्य का उत्तराखण्ड आगमन हुआ। उन्होंने बद्रीनाथ, केदारनाथ जैसे प्रमुख तीर्थों का पुनरुद्धार किया और सनातन धर्म को संगठित रूप प्रदान किया। उनके प्रयासों से चार मठों की स्थापना हुई, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक एकता को मजबूती मिली।
Q8. प्रसिद्ध पेशावर काण्ड किस वर्ष घटित हुआ था?
A) 1931
B) 1929
C) 1932
D) 1930
पेशावर काण्ड वर्ष 1930 में घटित हुआ, जब गढ़वाल राइफल्स के सैनिकों ने निहत्थे पठानों पर गोली चलाने से इंकार कर दिया। इस साहसिक निर्णय के लिए सैनिकों को कठोर दंड दिया गया। यह घटना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सैन्य असहयोग और नैतिक साहस का प्रतीक बन गई।
Q9. अमृतसर कांग्रेस (1919) में गढ़वाल क्षेत्र से किन दो नेताओं ने भाग लिया था?
A) बद्रीदत्त पाण्डेय व चिरंजीलाल
B) मुकुन्दीलाल व हरगोविन्द पंत
C) अनुसूया प्रसाद व मुकुन्दीलाल
D) गोविन्द बल्लभ पंत व विक्टर मोहन जोशी
1919 में आयोजित अमृतसर कांग्रेस में गढ़वाल क्षेत्र से मुकुन्दीलाल और हरगोविन्द पंत ने भाग लिया। यह कांग्रेस जलियांवाला बाग काण्ड के बाद हुई थी और राष्ट्रीय आंदोलन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रही। इन नेताओं की भागीदारी से गढ़वाल क्षेत्र की राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका स्पष्ट होती है।
Q10. गाड़ोदिया स्टोर डकैती काण्ड (1930) में उत्तराखण्ड से कौन क्रांतिकारी शामिल था?
A) रामसिंह
B) भवानी सिंह
C) सूर्यकान्त पांडे
D) सूर्यप्रताप सिंह
1930 में हुए गाड़ोदिया स्टोर डकैती काण्ड में उत्तराखण्ड से क्रांतिकारी सूर्यप्रताप सिंह शामिल थे। यह घटना ब्रिटिश शासन के विरुद्ध क्रांतिकारी गतिविधियों का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य आंदोलन के लिए धन एकत्र करना था। सूर्यप्रताप सिंह ने साहसपूर्वक स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया।
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