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प्राचीन भारतीय इतिहास सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तर | Ancient Indian History GK Questions and Answers in Hindi

Ancient Indian History
Ancient Indian History
इस पोस्ट में दिए गये सभी Questions विभिन्न परीक्षाओं जैसे कि UPSC, SSC, Railway, Banking, State PSC, CDS, NDA, SSC CGL, SSC CHSL, Patwari, Samvida, Police, SI, KVS, NVS, TGT, PGT, CTET, TET, RO/ARO, Army, MAT, CLAT, NIFT, IBPS PO, IBPS Clerk, CET,Vyapam और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत ही उपयोगी हैं

Q11. वैदिक काल में ‘गोत्र’ का क्या अर्थ था? (Ancient Indian History)

A) ग्राम संगठन
B) वंश समूह
C) प्रशासनिक इकाई
D) कर व्यवस्था

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✅ B) वंश समूह
वैदिक काल में गोत्र का अर्थ एक ही पूर्वज से उत्पन्न वंश समूह से था। इसका प्रयोग सामाजिक पहचान और विवाह नियमों के निर्धारण के लिए किया जाता था। समान गोत्र में विवाह निषिद्ध था। गोत्र व्यवस्था से वैदिक समाज की पारिवारिक और सामाजिक संरचना को समझने में सहायता मिलती है।

Q12. सिंधु घाटी सभ्यता में पाई गई ‘ग्रेट बाथ’ किस नगर में स्थित थी?

A) कालीबंगा
B) धोलावीरा
C) लोथल
D) मोहनजोदड़ो

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✅ D) मोहनजोदड़ो
ग्रेट बाथ मोहनजोदड़ो का सबसे प्रसिद्ध सार्वजनिक निर्माण था। यह पकी ईंटों से बना हुआ जलकुंड था, जिसमें जल निकासी की उत्कृष्ट व्यवस्था थी। इतिहासकारों का मानना है कि इसका प्रयोग धार्मिक स्नान या सामूहिक अनुष्ठानों के लिए किया जाता था, जिससे सिंधु सभ्यता की धार्मिक परंपराओं का ज्ञान मिलता है।

Q13. बौद्ध धर्म के त्रिरत्न (Three Jewels) में क्या शामिल है?

A) बुद्ध, संघ, तप
B) बुद्ध, धर्म, संघ
C) धर्म, तप, अहिंसा
D) बुद्ध, ध्यान, ज्ञान

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✅ B) बुद्ध, धर्म, संघ
बौद्ध धर्म के त्रिरत्न में बुद्ध (शिक्षक), धर्म (उपदेश) और संघ (भिक्षु समुदाय) शामिल हैं। बौद्ध अनुयायी इन तीनों में श्रद्धा रखते हैं। त्रिरत्न बौद्ध जीवन का आधार माने जाते हैं और मोक्ष प्राप्ति के मार्ग को दर्शाते हैं।

Q14. महाजनपद काल में कुल कितने महाजनपद थे?

A) 12
B) 14
C) 18
D) 16

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✅ D) 16
बौद्ध और जैन ग्रंथों के अनुसार महाजनपद काल में कुल 16 महाजनपद थे। इनमें मगध, कोसल, अवंति और वज्जि प्रमुख थे। यह काल राजनीतिक संगठन और राज्य व्यवस्था के विकास का महत्वपूर्ण चरण था, जहाँ छोटे जनपद शक्तिशाली राज्यों में परिवर्तित हुए।

Q15. जैन धर्म में ‘कैवल्य ज्ञान’ का क्या अर्थ है?

A) धार्मिक अनुष्ठान
B) पूर्ण ज्ञान
C) तपस्या
D) त्याग

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✅ B) पूर्ण ज्ञान
जैन धर्म में कैवल्य ज्ञान का अर्थ पूर्ण और सर्वोच्च ज्ञान से है। इसे प्राप्त करने के बाद आत्मा जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाती है। महावीर स्वामी ने कठोर तपस्या के बाद कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया था। यह जैन दर्शन में मोक्ष की अंतिम अवस्था मानी जाती है।

Q16. मौर्य काल में ‘धर्ममहामात्र’ किस उद्देश्य से नियुक्त किए गए थे?

A) कर संग्रह
B) न्याय प्रशासन
C) सेना संचालन
D) धम्म प्रचार

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✅ D) धम्म प्रचार
धर्ममहामात्रों की नियुक्ति सम्राट अशोक ने की थी। इनका कार्य धम्म के सिद्धांतों का प्रचार करना और समाज में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना था। वे जनता के कल्याण, कैदियों की देखभाल और विभिन्न धार्मिक समुदायों में समन्वय स्थापित करने का कार्य करते थे।

Q17. गुप्त काल में भूमि दान प्रथा का प्रमुख प्रभाव क्या पड़ा?

A) व्यापार वृद्धि
B) प्रशासनिक केंद्रीकरण
C) सामंतवाद का विकास
D) नगरों का विस्तार

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✅ C) सामंतवाद का विकास
गुप्त काल में ब्राह्मणों और अधिकारियों को भूमि दान दिए जाने लगे। इससे स्थानीय स्तर पर सामंतों का उदय हुआ, जो धीरे-धीरे शक्तिशाली बन गए। इस प्रक्रिया ने केंद्रीय सत्ता को कमजोर किया और सामंती व्यवस्था के विकास को बढ़ावा दिया, जो आगे चलकर मध्यकालीन भारत की विशेषता बनी।

Q18. वैदिक साहित्य में सबसे प्राचीन ग्रंथ कौन-सा है?

A) यजुर्वेद
B) सामवेद
C) अथर्ववेद
D) ऋग्वेद

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✅ D) ऋग्वेद
ऋग्वेद वैदिक साहित्य का सबसे प्राचीन ग्रंथ है। इसमें देवताओं की स्तुतियों से संबंधित 1028 सूक्त संकलित हैं। यह आर्यों के सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक जीवन की जानकारी देता है। ऋग्वेद से वैदिक कालीन सभ्यता और संस्कृति को समझने में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है।

Q19. हड़प्पा सभ्यता के लोग किस धातु का ज्ञान नहीं रखते थे?

A) तांबा
B) कांसा
C) लोहा
D) सोना

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✅ C) लोहा
हड़प्पा सभ्यता के लोग तांबा, कांसा और सोने का उपयोग करते थे, लेकिन उन्हें लोहे का ज्ञान नहीं था। इस कारण इसे कांस्य युगीन सभ्यता कहा जाता है। लोहे का प्रयोग भारत में बाद के वैदिक काल में प्रारंभ हुआ, जिससे कृषि और युद्ध तकनीक में बड़ा परिवर्तन आया।

Q20. बौद्ध धर्म में ‘अष्टांगिक मार्ग’ का उद्देश्य क्या है?

A) धार्मिक विस्तार
B) सामाजिक नियंत्रण
C) मोक्ष प्राप्ति
D) राज्य शासन

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✅ C) मोक्ष प्राप्ति
अष्टांगिक मार्ग बौद्ध धर्म का मुख्य सिद्धांत है, जिसका उद्देश्य दुःखों से मुक्ति और निर्वाण प्राप्त करना है। इसमें सम्यक दृष्टि, संकल्प, वाणी, कर्म, आजीविका, प्रयास, स्मृति और समाधि शामिल हैं। यह मार्ग नैतिक आचरण, मानसिक अनुशासन और प्रज्ञा पर आधारित है।

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